पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया और अब जितिन प्रसाद बीजेपी में शामिल, कांग्रेस के लिए यह किसी आघात से कम नहीं


Mayank Kumar

उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव  होना है लेकिन उससे पहले ही कांग्रेस पार्टी को एक बहुत बड़ा झटका लगा है। यूपी में कांग्रेस के बड़े नेता और राहुल गांधी -प्रियंका गाँधी के बेहद करीबी माने जाने वाले जितिन प्रसाद ने भाजपा का दामन थाम लिया है। कांग्रेस पार्टी के लिए ये किसी आघात से कम नहीं है।  आघात इसलिए क्योंकि उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव बेहद नजदीक है। 

ज्योतिरादित्य सिंधिया पहले ही बीजेपी का दामन थाम चुके हैं और उन्हें भी राहुल गाँधी का बेहद करीबी नेता बताया जाता था और जितिन प्रसाद के बीजेपी में शामिल होने के बाद कांग्रेस पार्टी पर खतरे के बदल मंडराने लगे हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया और जितिन प्रसाद, राहुल गाँधी की युवा मंडली का चेहरा माने जाते थे और इसी युवा मंडली के सदस्य मिलिंद देवरा और सचिन पायलट भी हैं। 

इस बात से बिलकुल भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि सचिन पायलट भी इन दिनों अपनी पार्टी से बेहद नाखुश हैं।  सचिन पायलट की ये शिकायत है कि उनसे जो वादे किये गए थे, वो अब तक पूरे नहीं किये गए हैं।  हालांकि, हम ये  नहीं जानते है कि उनकी  नाराजगी कितनी गंभीर है लेकिन सवाल ये है कि क्या कांग्रेस पार्टी उनकी नाराजगी दूर करने में कामयाब हो पाएगी ? कांग्रेस पार्टी को इस बात पर जल्द से जल्द  विचार करने की जरूरत है क्योंकि कांग्रेस में ऐसे नेताओं की संख्या बढ़ती जा रही है जिनका पार्टी से मोह भंग होता जा रहा है।

हर पांच से छह महीने में कांग्रेस पार्टी का कोई ना कोई नेता पार्टी को छोड़ रहा है। इस स्तिथि के लिए कांग्रेस नेतृत्व अपने अलावा किसी और को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकती है।  यहाँ सवाल ये भी खड़ा होता है कि आखिर ऐसा क्या है कि कांग्रेसी नेताओं को पार्टी के अंदर अपना भविष्य  अंधकार में जाता नजर आ रहा है।  इसको लेकर कांग्रेस के नेतृत्वकर्ताओं और गाँधी परिवार को सोचने की जरूरत है कि आखिर वो कौन सी वजह है कि उनके पार्टी के नेता खुद को पार्टी के अंदर सहज महसूस नहीं कर रहे हैं ?

जितिन प्रसाद के पार्टी छोड़ने के बाद ऐसा लगता नहीं है कि कांग्रेस पार्टी इसको लेकर जरा भी गंभीर है क्योंकि उनके बीजेपी में शामिल होने के बाद ये कहा जा है कि वो कुछ समय से चुनाव हार रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस ये खुद कैसे भूल गई कि राहुल गाँधी खुद अमेठी से लोकसभा चुनाव हार गए थे। 

गौर करें तो जितिन प्रसाद के बीजेपी में शामिल होने के बाद भाजपा को कोई भानुमति का पिटारा नहीं मिलने वाला है। यहाँ गहरा सवाल ये है कि जितिन प्रसाद के भाजपा में शामिल होने से क्या कांग्रेस पार्टी को इस बात का जरा सा भी इल्म है कि उसे कितना नुकसान होने वाला है या हो चुका है ?

कांग्रेस पार्टी अब अगर अपने युवा नेताओं के पलायन को नहीं रोक पाई और उनके जाने के लिए उन्हें ही दोषी ठहराती रही तो फिर उनके नेताओं के पलायन का सिलसिला कभी नहीं रुकने वाला है।  पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया और अब जितिन प्रसाद के पार्टी छोड़कर जाने से इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि युवा नेता कांग्रेस पार्टी में अपना उज्जवल भविष्य नहीं देख रहे हैं। 

कांग्रेस पार्टी के सामने ये विकट समस्या उस समय आकर खड़ी हो गई है जब राहुल गाँधी पर्दे के पीछे से पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं और प्रियंका गाँधी महासचिव के रूप में काम कर रही हैं। शायद ऐसा कहा जा सकता है कि कांग्रेस पार्टी के लिए ये शुभ संकेत नहीं हैं क्योंकि एक बाद एक नेता पार्टी छोड़ते जा रहे हैं तो दूसरी तरफ पार्टी भी कमजोर होती जा रही है और लोकतंत्र में विपक्ष का कमजोर होना देश के लिए खतरे की घंटी हो सकती है।    

कांग्रेस नेता जितेंद्र प्रसाद के बेटे हैं जितिन प्रसाद

जितिन प्रसाद का जन्म शाहजहाँपुर में हुआ है और वो कांग्रेस नेता जितेंद्र प्रसाद के बेटे हैं।  जितिन की प्रारम्भिक शिक्षा देहरादून के प्रतिष्ठित दून स्कूल से हुई। यहां उनकी मुलाकात ज्योतिरादित्य सिंधिया से हुई। सिंधिया उनके बचपन के दोस्त हैं। इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से वाणिज्य विषय में स्नातक किया और फिर नई दिल्ली के आईएमआई से एमबीए की डिग्री ली।

साल 2004 में पहली बार एमपी बनें

जितिन प्रसाद ने  भारतीय युवा कांग्रेस के जरिये साल 2001 में अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी। उन्हें आईवाईसी का महासचिव भी बनाया गया।  साल 2004 में वो पहली बार शाहजहांपुर सीट से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे। यूपीए की सरकार में वो इस्पात मंत्रालय के राज्य मंत्री बनें। फिर साल 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने धौरहरा सीट से चुनाव जीता। यूपीए के दूसरे कार्यकाल में वो  पेट्रोलिय एवं गैस मंत्रालय और सड़क परिवहन विभाग में राज्य मंत्री रहे। जितिन प्रसाद कांग्रेस पार्टी के महासचिव भी रह चुके हैं।

राहुल गांधी के फेवरेट रहे हैं जितिन प्रसाद

जितिन प्रसाद, राहुल गाँधी के बेहद करीबी और उनकी कोर टीम का हिस्सा भी रह चुके हैं। कहा जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से वो पार्टी की नीतियों से नाराज चल रहे थे। उनकी नाराजगी की वजह थी, यूपी कांग्रेस में कोई बड़ी जिम्मेदारी ना मिलना और यही कारण है कि वो कुछ समय से खुद को हाशिए समझ रहे थे। यहाँ पर हाशिए का मतलब है किसी को एक किनारे पर छोड़ देना।  हालांकि, वो अभी एक युवा राजनेता  हैं और उनमें सियासत की पारी बाकि है।  ऐसे में उन्होंने सोच समझकर भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया और हो सकता है की अब बीजेपी उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है। 

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