क्या चौथे टेस्ट मैच में साफ होगी Narendra Modi Stadium के पिच की मायाजाल ?


Mayank Kumar

इंग्लैंड के खिलाफ पिंक बॉल टेस्ट मैच में टीम इंडिया को दूसरे दिन ही 10 विकेट से जीत हासिल हुई। इस जीत से भारतीय टीम ने सीरीज में 2-1 की बढ़त बना ली है। इस मुकाबले में 140.2 ओवर फेंके गए। साथ ही 30 में से 28 विकेट स्पिनरों ने हासिल किए। पहली पारी में इंग्लैंड की टीम 112 और दूसरी पारी में 81 रन ही बना पाई। वहीं, भारतीय टीम ने पहली पारी में 145 रन बनाए, जिसके बाद मेजबानों ने 49 रन के लक्ष्य को 7.4 ओवर में हासिल कर तीसरे टेस्ट मैच को जीत लिया। भारतीय टीम ने इस मैच को जीत तो लिया लेकिन इस जीत ने कई सवाल खड़े कर दिए।

सवाल ये है कि क्या ये दर्शकों के साथ धोखा है या बल्लेबाजों की घटिया तकनीक, ये पिच की खामियां हैं या महज एक स्पिन का भ्रमजाल, क्या ये स्किड करती गुलाबी गेंद है, या सीधी गेंदों पर उड़ते विकेट? दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम यानी Narendra Modi Stadium में भारत और इंग्लैंड के बीच पिंक बॉल टेस्ट मैच भले ही दो दिन में खत्म हो गया हो लेकिन पूरे विश्व में पिच की चर्चा अब चाय की चर्चा बन चुकी है। दूसरे विश्व युद्ध के बाद ये पहला टेस्ट मैच है जो इतने कम गेंदों में हुआ। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि बीसीसीआई और गुजरात क्रिकेट संघ चार मार्च से शुरू होने वाले सीरीज के चौथे और आखिरी टेस्ट मैच में पिच को लेकर और सावधानी बरतेगी। बीसीसीआई यही चाहेगी अंतिम टेस्ट मैच कम से कम तीन या चार दिन चले।

हालांकि, ये पहली बार नहीं है जब पहली बार कोई टेस्ट मैच दो दिन में ख़त्म हुआ है। टेस्ट क्रिकेट के इतिहास ऐसा 22 बार हो चुका है लेकिन इस मुद्दे पर क्रिकेट जगत बंटा हुआ है। कुछ क्रिकेट पंडितों का कहना है कि ये टेस्ट क्रिकेट का गलत प्रचार है तो कुछ का कहना है कि आईसीसी इस पर कठोर निर्णय ले। इस मामले पर पूर्व इंग्लिश खिलाडि़यों और इंग्लिश मीडिया का रुख काफी मिला जुला है।

तो चलिए सबसे पहले बात कर लेते हैं उन लोगों की जो विरोध में अपनी राय प्रकट कर रहे हैं। इंग्लिश कमेंट्रेटर डेविड लॉयड का कहना है कि जब मैच में इस तरह की लॉटरी हो तो सही मायनों में मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि कौन जीत रहा है। ये कोई मुकाबला नहीं था। हां, तकनीक जरूर खराब रही है, लेकिन अगर ऐसी पिच आईसीसी को पसंद है तो आगे ऐसा और होगा। इसका विश्व टेस्ट क्रिकेट पर बहुत गहरा असर होगा। बोर्ड्स को और खास तौर पर इंग्लैंड में काफी कमाई इस बात से होती है कि मैच कितना लंबा चलता है। छोटे टेस्ट मैचों से आर्थिक तौर पर बहुत नुकसान होता है। पहले दिन मैंने इस पिच को बेनेफिट ऑफ डाउट दिया, लेकिन माफी चाहता हूं ये पिच पिछली पिच जैसी ही खराब थी। ऐसे में एक बार फिर सवाल आईसीसी से पूछना चाहिए। क्या आप खेल को ऐसे चलते हुए देखना चाहते हैं? टेस्ट मैच समय से इतना पहले खत्म हो जाए। ये मैच तो दो दिन भी नहीं चला? मैं आईसीसी से जवाब मांगता हूं, लेकिन मुझे वहां से कोई जवाब नहीं मिलेगा।

वैसे, बुधवार को जब मैच खत्म हुआ तो कप्तान विराट कोहली ने कहा था कि पिच बल्लेबाजी के लिए काफी अच्छी थी। दोनों टीमों के बल्लेबाजों ने खराब प्रदर्शन किया। 30 में से 21 विकेट सीधी गेंद पर गिरे। बल्लेबाज स्पिन के हिसाब से बल्ला और पैर मूव कर रहे थे, जबकि सीधी गेंद उनका स्टंप ले उड़ रही थीं या उनके पैड में लगकर एलबीडब्ल्यू कर रही थी। 

यहाँ पर गौर करने वाली बात ये है कि जब कप्तान कोहली के नेतृत्व में भारतीय टीम दक्षिण अफ्रीका में केपटाउन में हरी पिच पर और ऑस्ट्रेलिया के एडिलेड में डे-नाइट टेस्ट में हारी थी तब उन्होंने पिच की जरा सी भी बुराई नहीं की थी। टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली और कोच रवि शास्त्री का पिछले कई सालों से यही स्टैंड रहा है कि हमें विदेश में जैसी भी पिच मिलेगी, हम खेलेंगे लेकिन जब विदेशी टीम हमारे यहाँ आएगी तो उसे हमारी परिस्थितियों के हिसाब से खेलना होगा और ये राय अब विराट कोहली की ही नहीं बल्कि पूरी भारतीय टीम की बन गई है।

वहीं, पिंक बॉल टेस्ट मैच में अर्धशतक जड़ने वाले रोहित शर्मा ने भी कहा कि जब आप ऐसी पिच पर खेलते हैं तो आपके अंदर इरादा होना चाहिए। आपको रन बनाने की कोशिश भी करनी चाहिए। आप सिर्फ ब्लॉक नहीं कर सकते हैं । जैसा कि आपने देखा कि कोई-कोई गेंद ही टर्न हो रही थी और जब आप टर्न के लिए खेलते तो गेंद स्टंप की तरफ फिसल भी रही थी। अक्षर की स्टंप पर गेंद डालने की रणनीति कारगर साबित हुई। उन्होंने कमाल की गेंदबाजी की। अचानक से टीम में आकर इस तरह से प्रदर्शन करना आसान नहीं होता है। वो चोटिल थे, लेकिन चेन्नई में उन्होंने वापसी कर शानदार प्रदर्शन किया। यहां उन्होंने सीधे स्टंप पर गेंद डाली, जिसे खेल पाना बल्लेबाजों के लिए आसान नहीं था। चेन्नई में हुए दूसरे टेस्ट से ज्यादा गेंद अहमदाबाद में टर्न ले रही थी। वो पिच अधिक चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन अश्विन ने शतक जमाया और विराट ने भी अर्धशतक बनाया, इसलिए अपने बेसिक्स पर डटे रहकर आप रन बना सकते हैं। गुलाबी गेंद को खेलने के लिए बल्लेबाजों को काम करने की जरूरत है। डे-नाइट टेस्ट में ज्यादातर बल्लेबाज सीधी गेंद पर आउट हुए।

मैच ख़त्म होने के बाद इंग्लैंड के कप्तान जो रूट ने भी पिच को लेकर अपने विचार पेश किये। जो रुट ने बेहद ही डिप्लोमेटिक जवाब दिया। उन्होंने खुलकर इस पिच का विरोध नहीं किया। जो रुट का कहना है कि जो दर्शक इस मैच को देखने आए थे, उनके साथ धोखा हुआ और वे खुद को लूटा हुआ महसूस कर रहे होंगे। मैच खत्म होने के बाद रुट ने कहा कि ये बड़े ही शर्म की बात है क्योंकि ये एक शानदार स्टेडियम है और हजारों लोग इस उम्मीद से आए थे कि एक बेहतरीन और यादगार मैच देखने को मिलेगा। मेरे हिसाब से उनके साथ धोखा हुआ है।

पिच को लेकर क्या है पूर्व क्रिकेटरों की राय

अब आपको बताते हैं कि दुनिया के सबसे बड़े स्टेडियम यानी Narendra Modi Stadium के पिच को लेकर पूर्व दिग्गज खिलाड़ियों की राय क्या है ? भारतीय टीम के पूर्व खिलाड़ी युवराज सिंह ने कहा कि मुझे नहीं पता कि दो दिन में खत्म हुआ मैच टेस्ट क्रिकेट के लिए अच्छा है या नहीं। अगर अनिल कुंबले और हरभजन सिंह इस तरह की पिच पर गेंदबाजी करते तो वो 1000 और 800 विकेट ले चुके होते।

इस पिच को लेकर संजय मांजरेकर ने कहा कि मुझे लगता है कि अब चार दिनों के टेस्ट क्रिकेट का आइडिया खराब है।

Narendra Modi Stadium के पिच को लेकर पूर्व इंग्लिश कप्तान एंड्रयू स्ट्रॉस ने कहा कि पहले दिन मुझे लगा कि अच्छी तकनीक के साथ अहमदाबाद की पिच पर रन बनाए जा सकते हैं, लेकिन दूसरे दिन सब लॉटरी जैसा था।

वहीं, इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइक अथर्टन ने भी कहा कि मुझे लगता है कि पिच चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन ऐसी भी नहीं थी कि इसमें खेला नहीं जा सके। इंग्लैंड पहली पारी में 112 रनों से ज्यादा बना सकता था। इससे उन्हें फायदा मिलता।

इसके बाद इंग्लैंड के पूर्व कप्तान केविन पीटरसन ने अपने विचार पेश करते हुए कहा कि अगर इंग्लैंड ने यह टेस्ट मैच जीत लिया होता तो हम यहां बैठकर बात नहीं कर रहे होते। इस विकेट के बारे में कुछ भी खतरनाक नहीं था। अगर विकेट खतरनाक है, तो तब आइसीसी अंक घटाने का फैसला कर सकती है। हां, इस टेस्ट मैच में निश्चित रूप से बल्ले पर गेंद की जीत हुई और यह एकतरफा रहा। आप भारतीय उप-महाद्वीप में हैं। जब आप पर्थ जाते हैं, तो वहां क्या होता है?

इंग्लैंड के पूर्व कप्तान सर ज्यौफ्री बॉयकॉट ने भी कहा कि ऐसा किसी नियम में नहीं लिखा है कि किस तरह की पिच बनानी चाहिए। पिच पर टॉस जीतकर पहले खेलने का विकल्प हमें मिला, फिर भी वे जीत गए।

अंत में इंग्लैंड के एक और पूर्व कप्तान नासिर हुसैन ने कहा कि पिच को लेकर काफी बात हो रही है, लेकिन बॉटम लाइन ये है कि टॉस जीतने के बाद इंग्लैंड का स्कोर एक समय 73/2 था। उसके बाद वो मैच हार गए। इंग्लैंड सिर्फ पिच का बहाना नहीं दे सकता।

इन सभी बयानों को देखकर एक बात तो साफ़ होती है कि इंग्लैंड की हार का ठीकरा सिर्फ पिच पर ही नहीं फोड़ा जा सकता है। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि दोनों तरफ के बल्लेबाजों ने खराब बल्लेबाजी की है। ऐसे में सिर्फ पिच को ही दोष नहीं दिया जा सकता है। 

पिच को लेकर क्या कहते हैं आईसीसी के नियम

आईसीसी के नियम के मुताबिक खराब पिच एक ऐसा ट्रैक होता है जहां गेंद और बल्ले के बीच संतुलित मुकाबला नहीं हो पाता है। अगर पिच बल्लेबाजी के लिए ज्यादा आसान हो और गेंदबाजों को जरा भी मदद नहीं मिल रही हो, या फिर पिच में ज्यादा स्पिन या सीम हो और बल्लेबाजों को रन बनाने का मौका नहीं मिल रहा हो तो उसे खराब पिच कहा जाता है। अगर पिच में स्पिनरों को बहुत ज्यादा मदद मिल रही है तो वो भी खराब पिच की श्रेणी में आती है। भारतीय उपमहाद्वीप में पहले दिन कुछ डिग्री तक गेंद घूमना गलत नहीं है, लेकिन उसके साथ उछाल नहीं होना चाहिए। अगर आईसीसी किसी पिच को खराब घोषित कर देती है तो उस स्टेडियम पर दो साल का बैन लग सकता है। अगर किसी स्टेडियम का डीमेरिट नंबर 5 तक चला जाता है तो आईसीसी उसकी मान्यता एक साल तक बैन करती है। वहीं, दस डीमेरिट नंबर पर उस स्टेडियम पर दो साल तक मैच नहीं खेला जा सकता है। 

इन पिचों को बताया जा चुका है खराब

भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच साल 2018 में टेस्ट मैच खेला जा रहा था। उस समय जोहानिसबर्ग के पिच को खराब श्रेणी में रखा गया था। खेल के तीसरे दिन आसमान उछाल की वजह से इस पिच पर सवाल खड़े हुए थे और तब खेल को रोकना तक पड़ा था। वहीं, साल 2017 में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पुणे टेस्ट मैच के दौरान इस्तेमाल की गई पिच को भी खराब बताया गया था लेकिन उस पिच पर स्टीव स्मिथ ने शतक जड़ा था और उमेश यादव ने चार विकेट चटकाए थे जबकि अहमदाबाद टेस्ट की बात करें तो यहां तेज गेंदबाजों को 30 में मात्र दो विकेट हासिल हुए तो वहीं, स्पिनरों ने 28 विकेट हासिल किए और हैरानी की बात तो ये है कि 17 विकेट एक ही दिन में गिर गए थे। 

हालांकि, यहाँ सोचने वाली बात ये है कि अहमदाबाद के इस स्टेडियम पर तकरीबन नौ साल के बाद इंटरनेशनल मैच खेला जा रहा है। इस स्टेडियम की नींव खुद नरेंद्र मोदी ने रखी थी। उस समय नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और अब वो देश के प्रधानमंत्री हैं। ये स्टेडियम अभी हाल ही में बनकर तैयार हुआ है, ऐसे में पिच को थोड़ा और परखने की जरूरत है। इसी मैदान पर भारत और इंग्लैंड के बीच सीरीज का चौथा और आखिरी टेस्ट मैच खेला जाना है। उम्मीद है, आखिरी टेस्ट मैच में इस पिच की मायाजाल साफ़ हो जाएगी। 

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