फिल्म बाला के जबरदस्त रिव्यू


Purti Agnihotri

आज कल कम उम्र में बाल झड़ना बहुत आम हो गया है और यह एक बहुत बड़ी समस्या है जो कि जवान उम्र के लोगों को बहुत हैरान करती है।  लोग अपने गंजेपन को दूर करने के लिए ना जाने कितने जतन करते हैं तरह तरह के शैम्पू, आयल और ना जाने किन किन जड़ी बूटियों का इस्तेमाल भी करते हैं।  इसी दर्द को उन सभी मजबूर लोगों के साथ बाँटने आ रहे हैं आयुष्मान खुराना अपनी फिल्म "बाला" के साथ। यह फिल्म उन सभी लोगों के लिए है जो गंजेपन का शिकार हैं और समाज में लोगों के बीच मज़ाक का पात्र बनते हैं।  

फिल्म के डायरेक्टर अमर कौशिक हैं और इस फिल्म की कहानी को नीरेन भट्ट ने बहुत ही खूब अंदाज़ में बयां किया है। अखबार के विज्ञापन की कहानी को सिनेमाघरों के बड़े परदे पर बहुत ही बखूबी से उतारा गया है। एक्टर आयुष्मान खुराना के साथ फिल्म के बाकी सभी कलाकारों ने फिल्म में बहुत ही जबरदस्त किरदार निभाया है। आयुष्मान ने एक बार फिर इस फिल्म से लोगों के दिलों में राज़ कर लिया है। 

फिल्म की शुरुआत उत्तरप्रदेश के कानपुर जिले की देसी भांषा से शुरू होती है। फिल्म में आयुष्मान जो कि बालमुकुंद शुक्ला यानी कि 'बाला' का किरदार निभा रहे हैं।  बाला को बचपन में अपने लंबे बालों और जबरदस्त एटीट्यूड के लिए जाना जाता था। बचपन से ही कानपुर के एक स्कूल बाला लड़कियों के बीच अपने बालों की स्टाइल की वजह से काफी फेमस थे।  दोस्त हो या अध्यापक बाला हर किसी का मज़ाक उड़ाया करते थे,  लेकिन वो कहते हैं न कि हर किसी का वक़्त आता है और ऐसा ही कुछ हुआ बाला के साथ जब एक समय में वो खुद ही मज़ाक का पात्र बन गए।  बाला जब 25 साल के थे तबसे उनके बाल झड़ना शुरू हो गए और फिर क्या शुरू हो गयी उनकी ज़िन्दगी में परेशानी। उन्होंने बाल गिरने की वजह से ना जाने कितनी बार 200 से ज्यादा नुस्खे अपनाए, लेकिन फिर भी कोई हल नहीं निकला। आखिरकार उन्हें नकली बाल यानी विग का सहारा लेना पड़ा।  

वहीं दूसरी ओर  हमारे समाज में लड़कियों के सांवले और काले रंग की वजह से काफी अपमान सहना पड़ता है।  Bhumi Pednekar फिल्म में लतिका त्रिवेदी वकील का किरदार निभा रही हैं और वो अपने दोस्त बाला को कई बार आईना दिखने की कोशिश करती हैं, अपने काले रंग की वजह से उन्हें बचपन से लोगों का ताना काफी तने सुनने को मिलते हैं,  और फिर बाला की लाइफ में परी मिश्रा यानी Yami Gautam आती हैं, जो अपने नाम के जैसे ही बाला की ज़िन्दगी में एक पारी बनकर अति हैं।  

फिल्म में बाला और बाकी सभी कलाकार कानपुरिया भाषा के साथ चटकारे लगाते नज़र आरहे हैं। फिल्म में भूमि पेडनेकर और यामी गौतम भी अपने किरदार में काफी जैम रही हैं।   फिल्म की स्टोरी, भाष, डायलॉग के साथ ही फिल्म के सारे सीन इतनी बेहतरीन नज़र आरहे हैं की आप फिल्म का एक भी सीन मिस नहीं करना चाहेंगे।  यह फिल्म मनोरंजन के साथ ही पब्लिक में एक मैसेज देने वाली फिल्म भी है। 

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