कुछ ऐसा रहा है पिंक बॉल क्रिकेट का इतिहास, मात्र तीन दिन में हुए हैं मैच खत्म


Mayank Kumar

22 नवंबर को भारत और बांग्लादेश के बीच ईडन गार्डन के मैदान पर टेस्ट सीरीज का अंतिम और ऐतिहासिक मुकाबला खेला जाएगा। ये मुकाबला ऐतिहासिक इसलिए है क्योंकि पहली बार भारत और बांग्लादेश की टीमें गुलाबी गेंद से डे-नाइट टेस्ट मैच खेलेंगी। दोनों टीमों के खिलाड़ियों को एक नया अनुभव मिलेगा लेकिन साथ में परेशानी भी मिलेगी। 

दरअसल, परेशानी की बात यह है कि अब तक गुलाबी गेंद से 11 मुकाबले खेले गए हैं लेकिन इनमें से आधे से अधिक मुकाबले पांच दिन तक चल नहीं पाए हैं। गुलाबी गेंद से खेलने की शुरुआत साल 2015 में हुई। पहली बार गुलाबी गेंद से खेलने का स्वाद ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की टीम ने चखा। मेजबान कंगारू टीम और न्यूजीलैंड की टीम के बीच खेले गए, इस मुकाबले ने मात्र तीन दिन में ही दम तोड़ दिया। यही से गुलाबी गेंद से खेलने की परंपरा उभर कर सामने आई और अब ये परंपरा भारत में भी धूम मचाने को तैयार है। 

गुलाबी गेंद से भारत और बांग्लादेश के बीच 12वां टेस्ट मैच खेला जाएगा। भारत और बांगलादेश से पहले ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान, वेस्टइंडीज, श्रीलंका, साउथ अफ्रीका और जिम्बाब्वे की टीमें गुलाबी गेंद से डे नाईट टेस्ट मैच खेले चुकी हैं। इन 11 मुकाबलों में से 6 मुकाबले पांचवे दिन तक पहुंच ही नहीं पाएं। कई टीमों की तो हालात पस्त हो गई थी। 

जनवरी 2019 में ब्रिसबेन के मैदान पर गुलाबी गेंद से श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया के बीच डे-नाइट टेस्ट मैच खेला गया था। इस मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने श्रीलंकाई टीम को मात्र तीन दिन के अंदर ही पारी और 40 रनों से करारी शिकस्त दी थी। भारत और बांग्लादेश की टीमें पहली बार गुलाबी गेंद का सामना करेंगी और ऐसे में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि इस मुकाबले में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल सकता है। 

वैसे गौर करें तो भारतीय टीम के पास अनुभव का पिटारा है लेकिन बांग्लादेश की टीम में  अनुभव की कमी है। बांग्लादेश की टीम के पास उस तरह के गेंदबाज नहीं हैं जो कोहली, रोहित और रहाणे जैसे खतरनाक बल्लेबाजों का 5 दिनों तक मुकाबला कर पाएं। 

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