बिहार में बाढ़ पर राजनीतिज्ञ कर रहे हैं एक दूसरे पर मौखिक वार


Mayank Kumar

बिहार में बाढ़ अपनी चरम सीमा पर है लेकिन इन सब के बीच राजनीती के बड़े-बड़े पंडित एक दूसरे पर कटाक्ष करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। हम बात कर रहे हैं बीजेपी और जदयू के बीच चल रहे मौखिक वार की। 

शुक्रवार को  केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने जदयू पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर सच बोलने का दूसरा नाम बगावत है तो आप हमें बागी समझ सकते हैं। मैं सच बोलता था और आगे भी सच बोलता रहूँगा, चाहे कुछ भी हो जाए। मैं सच बोलना किसी भी कीमत पर नहीं छोडूंगा। जिन्हें गालियां देनी है वो दें, मुझे तो आदत है, गालियां सुनने की। उनके गालियों से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। 

गिरिराज ने आगे कहा कि मेरे विभाग पर जो लोग प्रश्न उठा रहे हैं, उनसे मैं साफ़ तौर पर कह देना चाहता हूँ कि मेरे विभाग को पीएम मोदी देखते हैं। जब भी प्रधानमंत्री जी बोलेंगे मैं अपने पद और सदस्यता दोनों से त्यागपत्र दे दूंगा। मुझे मेरे क्षेत्र में जाने के लिए किसी के सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं है। मैंने अपने क्षेत्र को लेकर सवाल उठाया था, उस वक़्त अधिकारियों के पक्ष में कौन लोग खड़े हुए थे। मैं गूंगा और बहरा नहीं हूं। ऐसी दुर्दशा हमेशा हुई है और खासकर तब, जब-जब अधिकारियों का राजनीतिकरण किया गया है। 

गौरतलब है कि गिरिराज सिंह ने पहले कहा था  पटना की जो दुर्दशा हुई है उसके लिए सिर्फ बिहार सरकार जिम्मेदार है। उन सभी अफसरों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए जिनकी वजह से पटना डूब गया। इस मामले पर सीएम नीतीश कुमार को गंभीर होने की जरूरत है। 

वैसे यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि 'बिहार में बाढ़ है और चल रहा मौखिक वार है'। आम जन जीवन अस्त-व्यस्त है, जनता बाढ़ से त्रस्त है लेकिन मुख्यमंत्री अपनी बयानबाजी में और अखबारों में विज्ञापन देकर लोगों से राहत कोष में खुलकर दान करने की अपील करने में मस्त हैं और हों भी क्यों ना क्योंकि 'बिहार में बाढ़ है, नीतीश कुमार है'।

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