इंदिरा गाँधी की 102वीं जयंती पर जानें अनसुने किस्से


Purti Agnihotri

आज से 102 साल पहले यानी 19 नवंबर को भारत की महान महिला इंदिरा गाँधी का जन्म हुआ था। इंदिरा 2 बार देश की प्रधानमंत्री रह चुकी हैं।  पहले जनवरी 1966 से लेकर मार्च 1977 तक और फिर जनवरी 1980 से लेकर अक्तूबर 1984 और फिर जून 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में सैन्य कार्रवाई, जिसकी कीमत उन्हें अपने सिख अंगरक्षकों के हाथों जान गंवाकर चुकानी पड़ी थी।  इंदिरा के ताकतवर भाषण और अनेकों पोस्टर देख कर यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि कैसी थी भारत की इस आयरन लेडी की शख्सियत।  इंदिरा से जुड़े कई सारे ऐसे किस्से  हैं जो इनकी शख्सियत को बयां करते हैं और आज हम इनकी जिंदगी से जुड़े एक ख़ास किस्से के बारे में जानेंगे।  

इलाहाबाद के स्वराज भवन में इंदिरा का जन्म हुआ।  पहली झलक देखते ही दादा मोतीलाल नेहरू ने कहा की यह इंदिरा है।  फिर पिता पंडित नेहरू ने अपनी बेटी को नाम दिया प्रियदर्शिनी। सुन्दर सी मासूम मुखड़े वाली बच्ची को कई सारे नामों से पुकारा जाने लगा लेकिन यह बच्ची देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के नाम पूरे विश्व में जानी गई। इंदिरा ने अपने एक इंटरव्यू के दौरान इस बात को बताया की उनकी हिंदी इतनी अच्छी कैसे है।  उन्होंने बताया की उन्हें हिंदी का ज्ञान अपनी माँ से मिला , उन्होंने यह भी बताया की हमेशा से उनकी माँ कहती थी की चाहे कितनी भी आपदा आ जाए हमेशा उनका डट कर सामना करना चाहिए।  

इंदिरा का बचपन से ही राजनीति के माहौल में पाली बढ़ी थी और यही वजह थी राजनीती उनकी रगों में थी। इंदिरा ने अपने राजनितिक जीवन में कई सारे कड़े फैसले लिए  और उन्ही में से एक फैसला था आपातकाल, जिसका चारों तरफ विरोध हुआ, और नतीजा यह हुआ कि  केंद्र में गैर कांग्रेसी सरकार बन गई । वैसे यह सरकार ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पायी और भारत की जनता ने इंदिरा को दुबारा सरकार बनाने का न्यौता दिया।  

तो ऐसी थी हमारे देश की पहली महिला प्रधानमंत्री जिनके अंदर निर्भीक फैसले और दृढ़निश्चय लेने की छमता थी और यही  कारण है की इंदिरा गाँधी को 'लौह महिला' भी कहा जाता है।

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