अफ़ग़ानिस्तान में आईएसआईएस ने मस्जिद में किया ब्लास्ट, करीब 100 लोगों की मौत, जानिए कौन है आईएसआईएस खुरासान


Kuldeep kumar

अफगानिस्तान में लगातार बड़े बम हमले हो रहे हैं। जिनमें मस्जिदों और शिया मुस्लिमों को निशाना बनाया जा रहा है। शुक्रवार को देश के उत्तरी हिस्से के  कुदुंज़ प्रान्त में एक मस्जिद के भीतर आत्मघाती हमला हुआ। जिसमें कम से कम 100 लोगों की मौत हो गई है। जबकि दर्जनों लोग घायल बताए जा रहे हैं। ब्लास्ट शुक्रवार को जुमे की नमाज़ के दौरान हुआ।  

मस्जिद में बिखरी पड़ी थीं लाशें 

मस्जिद में हुए हमले के बाद की तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए हैं जो झकझोर देने वाले हैं। इनमें हर जगह खून बिखरा हुआ दिख रहा है। घटना की जिम्मेदारी वैश्विक आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने ली है। अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट की एक शाखा इस्लामिक स्टेट खुरासान यानी आईएसआईएस-के है। अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की सरकार बनने के बाद यह देश में पहला बड़ा हमला है। 

कुंदुज प्रांत के तालिबान के उप पुलिस प्रमुख ने कहा कि शुक्रवार का हमला एक आत्मघाती हमलावर द्वारा किया गया हो सकता है। उन्होंने कहा, "मैं अपने शिया भाइयों को आश्वस्त करता हूं कि तालिबान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तैयार है." 

आइए आपको बताते हैं कब, क्यों और कैसे बना आईएसआईएस... 

आईएसआईएस 1999 में स्थापित हुआ और दुनिया ने 2014 में इसे जानना शुरू किया। आईएसआईएस का प्रभाव सीरिया, इराक या बाकी दूसरे शहरों में इससे पहले नहीं था। आईएसआईएस- खुरासान, आईएसआईएस की ही एक शाखा है। इस शाखा को 2015 में तालिबान के पाकिस्तानी सहयोगी के असंतुष्ट सदस्यों द्वारा बनाया गया था। इस शाखा को तालिबान और अमेरिका का कट्टर दुश्मन माना जाता है। 

आईएसआईएस-के कहाँ से आया 

खुरासान शब्द एक प्राचीन इलाके के नाम पर आधारित है, जिसमें कभी उज्बेकिस्तान, अफगानिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और ईराक का हिस्सा शामिल हुआ करता था। वर्तमान में यह अफगानिस्तान व सीरिया के बीच का हिस्सा है। आईएसआईएस-के खुरासान मॉड्यूल को 'खोरासान ग्रुप' के नाम से भी जाना जाता है। इस ग्रुप में अलग विचारधारा रखने वाले आतंकी संगठन अलकायदा से जुड़े लोग शामिल हैं। इस ग्रुप को मुख्य तौर पर सीरिया, खुरासान से चलाया जाता है और इस पूरे आईएसआईएस की नींव रखने वाल शख्स बगदादी था, जिसने 2006 में इस आतंकी संगठन को बनाया। उस वक़्त अमेरिका और इराक के बीच लम्बी लड़ाई चली थी और अमेरिका इराक को सद्दाम हुसैन के चंगुल से आज़ाद करा चुका था। लेकिन इस लड़ाई के चलते इराक पूरी तरह तहस-नहस हो चुका था। अमेरिकी सेना के इराक छोड़ने के बाद इराक में कई छोटे-छोटे गुट बन गए और उन्होंने अपनी ताक़त की लड़ाई शुरू कर दी। उन्हीं में से एक गुट का नेता था अबू बकर अल बगदादी। बगदादी अलक़ायदा इराक का प्रमुख था। वह 2006 से ही इराक में अपनी ज़मीन तैयार कर रहा था लेकिन उस वक़्त न तो उसके पास पैसे थे, न कोई मदद थी और न ही लड़ाके। 

सद्दाम की मौत के बाद बगदादी का कब्ज़ा 

दरअसल अमेरिकी सेना 2011 में जब इराक से लौटी तब तक वो इराकी सरकार को पूरी तरह बर्बाद कर चुकी थी। सद्दाम मारा जा चुका था। इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरीके से बर्बाद हो चुका था और सबसे बड़ी बात यह कि अमेरिकी, इराक में खाली सत्ता छोड़ गए थे। बगदादी अमेरिका के जाते ही इराक पर अपना कब्ज़ा जमाना चाहता था लेकिन उस वक़्त वो संसाधन की कमी के चलते कामयाब नहीं हो पा रहा था। हालाँकि उसने अपने संगठन का नाम बदलकर अलक़ायदा से आईएसआई यानी इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक रख लिया था। इसके बाद बगदादी ने सद्दाम हुसैन की सेना के कमांडर और सिपाहियों को अपने साथ मिला लिया। फिर बगदादी ने शुरूआती निशाना पुलिस, सेना के दफ्तर, चेकपॉइंट्स और रिक्रूटिंग स्टेशंस को बनाया। उस वक़्त तक बगदादी के संगठन में कई हज़ार लोग शामिल हो चुके थे। इसके बावजूद भी बगदादी को इराक में वो कामयाबी नहीं मिल पा रही थी जिसकी वजह से बगदादी मायूस हो गया और उसने अपना रुख सीरिया की तरफ कर लिया। सीरिया में उस वक़्त गृह युद्ध चल रहा था और फ्री सीरियन आर्मी वहां के दो सबसे बड़े गुट थे। 

फ्री सीरियन आर्मी की दुनिया से अपील 

इसके बाद बग़दादी ने सीरिया में कामयाब होना चाहा लेकिन पहले चार साल तक तो बगदादी को यहाँ कोई बड़ी कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद बगदादी ने फिर से अपने संगठन का  नाम बदला और आईएसआईएस यानी इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया कर दिया। जून 2013 में फ्री सीरियन आर्मी के जनरल ने पहली बार दुनिया के सामने आकर अपील की कि अगर उन्हें हथियार नहीं मिले तो वो बागियों से अपनी जंग एक महीने के भीतर हार जाएंगे। इस अपील के एक हफ्ते के अंदर ही अमेरिका, इसराइल, जॉर्डन, तुर्की, सऊदी अरब और क़तर ने फ्री सीरियन आर्मी को हथियार, पैसे और ट्रेनिंग की मदद देनी शुरू कर दी। इन देशों ने सारे आधुनिक हथियार सीरिया पहुंचा दिया और  बस यहीं से आईएसआईएस के दिन पलट गए। 

आईएसआईएस को अमेरिका ने दी ट्रेनिंग 

दरअसल जो हथियार फ्री सीरियन आर्मी के लिए थे, वो साल भर के अंदर आईएसआईएस तक जा पहुंचे, क्योंकि तब तक आईएसआईएस फ्री सीरियन आर्मी में सेंध लगा चुका था। साथ ही सीरिया में फ्रीडम फाइटर का नकाब पहन कर भी आईएसआईएस ने दुनिया को धोखा दिया। इसी नकाब की आड़ में खुद अमेरिका तक ने अनजाने में आईएसआईएस के आतंकवादियों को ट्रेनिंग भी दे डाली थी। 

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