दिल्ली के कारोबारी ने इराक़ के तानाशाह के बारे में पढ़कर उठाया खौफनाक कदम, पत्नी के परिवार को उतारा मौत के घाट


Kuldeep kumar

दिल्ली में कुछ वक़्त पहले एक ऐसी वारदात हुई, जिसकी वजह से इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन का किस्सा ताजा हो गया। चलिए आपको पहले वो बता देते हैं जिसकी वजह से तानाशाह सद्दाम का नाम सबकी जुबान पर आ गया। दरअसल 23 मार्च को दिल्ली में एक कारोबारी वरुण अरोड़ा को पुलिस ने गिरफ्तार किया। वरुण पर आरोप है कि उसने अपनी सास, साली और अपनी पत्नी को मछली में ज़हर मिलाकर दे दिया, जिससे सास और साली की मौत हो गई थी और आरोपी की पत्नी दिव्या 40 दिनों से सर गंगाराम अस्पताल में ज़िन्दगी और मौत के बीच झूल रही थी, लेकिन अब दिव्या ने भी दम तोड़ दिया। ये ज़हर इतना खतरनाक है कि आसानी से इसका मिलना भी अंसभव है लेकिन वरुण ने इसे कैसे पाया, कैसे इस ज़हर के बार में उसको पता चला सब आपको हम बताएँगे।

तानाशाह के बारे में पढ़कर पता चला ज़हर का नाम :-

ज़हर, जिसका पता वरुण को इराक़ के तानाशाह रहे सद्दाम हुसैन के बारे में पढ़कर पता चला। ज़हर, जो सद्दाम अपने विरोधियों, अपनी मुख़ालफ़त करने वालों को देकर मरवा डालता था। ऐसा ज़हर जिसका आसानी से मिलना तक दूभर है। वो ज़हर है थैलियम ज़हर...
 

आरोपी के ससुर ने जताया संदेह :-

37 साल के वरुण अरोड़ा के खिलाफ उसके ससुर देवेंद्र मोहन शर्मा ने, जो दवा कारोबार से जुड़े हैं, उन्होंने शिकायत दर्ज कराई थी। देवेंद्र की शिकायत के मुताबिक, बात इसी साल जनवरी की है। देवेंद्र ने पुलिस को बताया कि वह इंद्रपुरी में रहते हैं और उनकी फैक्ट्री दिल्ली में है। थैलियम के चलते उनकी बेटी प्रियंका शर्मा और उनकी पत्नी अनिता शर्मा की मौत हो चुकी है, अब उनकी बड़ी बेटी दिव्या भी इस दुनिया को अलविदा कह गई।
 

खुद पकाकर खिलाई थी ससुरालवालों को मछली :-

देवेंद्र ने बताया कि उनके दामाद ने अपनी पत्नी समेत उनके पूरे परिवार को खत्म करने की साजिश रची थी। वरुण ने अपनी पत्नी, सास, ससुर और साली के लिए मछली पकाई, जिसे खाने के बाद सबकी तबीयत बिगड़ गई। वरुण ने ख़ुद तबीयत ख़राब होने की बात कहकर मछली नहीं खाई। दो बच्चों को भी नहीं खिलाई। बाकी लोग अस्पताल में भर्ती हुए, ब्लड टेस्ट हुआ तो पता चला कि सभी को खाने में ज़हर दिया गया है। ज़हर भी कोई मामूली नहीं, बल्कि थैलियम।

दरअसल 31 जनवरी को वरुण करीब तीन बजे अपनी ससुराल पहुंचा, उस वक़्त घर पर सास अनिता और पत्नी दिव्या मौजूद थी, साली बाहर पार्टी में गयी हुई थी। वरुण ने सबसे पहले अपनी सास और पत्नी को मछली खिलाई, फिर साली के आने का इंतज़ार करने लगा, जब शाम करीब 5 बजे साली घर पर आई तो वरुण ने उसको भी मछली खाने को दी और फिर वरुण वहां से चला गया। वरुण ने जबड़े में दर्द बताकर न तो खुद मछली खाई थी और ना ही अपने दोनों बच्चों को खाने दी थी।

एक-एक करके आई मौत :-

इसके बाद 4 फरवरी को सबसे पहले आरोपी की साली प्रियंका की तबियत ख़राब हुई और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ 15 फरवरी को उसकी मौत हो गई। फिर सास की तबियत ख़राब हुई, 4 मार्च को अनिता को भी अस्पताल में भर्ती कराया गया, 21 मार्च को अनिता की भी मौत हो गई। जबकि वरुण की पत्नी दिव्या पिछले 40 दिनों से कोमा में थी। जिसने 8 अप्रैल की देर रात दम तोड़ दिया। देवेन्द्र ने अपने दामाद पर हत्या करने का संदेह जताया।

पुलिस की पूछताछ में उठा रहस्य से पर्दा :-

इसके बाद पुलिस ने मामले की पड़ताल की।  23 मार्च को पुलिस ने देवेंद्र शर्मा का मेडिकल कराया। डॉक्टर तब हैरान रह गए, जब उन्हें देवेंद्र के खून में थैलियम का स्तर बढ़ा हुआ मिला।  पुलिस ने अनिता शर्मा का पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच कराई। इसमें भी थैलियम का स्तर बढ़ा होने की पुष्टि हुई।  इसके बाद पुलिस ने वरुण को गिरफ्तार कर लिया।

वरुण से जब पूछताछ की गई तो वरुण ने सारी सच्चाई कबूल कर ली। इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक पुलिस ने बताया  कि “छह साल पहले वरुण अरोड़ा के पिता की मौत हो गई थी। इसी समय वरुण की पत्नी प्रेगनेंट थीं। वरुण का मानना था कि उनके पिता अब उनकी संतान के रूप में वापस आएंगे।

अबॉर्शन की वजह से पाल बैठा था दुश्मनी :-

लेकिन पत्नी की प्रेगनेंसी में कुछ दिक्कतें आ गईं। डॉक्टर ने अबॉर्शन की सलाह दी। वरुण इसके लिए राज़ी नहीं था। लेकिन पत्नी ने डॉक्टर की सलाह मानकर अबॉर्शन कराया। पत्नी के घरवालों ने भी उसका साथ दिया। तभी से वरुण पत्नी और ससुराल वालों से बदला लेना चाह रहा था। बाद में वरुण और उनकी पत्नी को IVF से दो बच्चे हुए, लेकिन वरुण की बदला लेने की चाहत बरकरार रही।” वरुण पर IPC की धारा-302 (हत्या) के तहत केस दर्ज किया गया है।

थैलियम क्या है और क्यों जुड़ा इससे सद्दाम का नाम :-

चलिए आपको अब थैलियम के बारे में बताते हैं कि ये कितना खतरनाक है और इराक़ के तानाशाह सद्दाम हुसैन से इसका क्या कनेक्शन है। बता दें कि थैलियम ऐसा ज़हर है, जो शरीर में अचानक से कोई बदलाव नहीं करता बल्कि इसका असर दिखने में कई दिन भी लग जाते हैं। इससे आपके बाल झड़ने लगते हैं, जोड़ों में दर्द और बुखार आता है, मतलब कि ये ऐसे लक्षण है जिससे कोई नहीं समझ सकता कि ये ज़हर के लक्षण हैं और जब तक कोई समझे, तब तक ये पूरे शरीर में फैल जाता है। अगर बहुत बारीकी से अध्ययन न किया जाए, तो कोई समझ भी नहीं सकता कि मौत थैलियम से हुई है।

वैसे तो थैलियम को पाना इतना आसान नहीं है लेकिन वरुण ने अपने ससुर के नाम पर इसे ख़रीदा। उसने कहा कि वह अपने ससुर के साथ मिलकर एक दवा पर काम कर रहा है और दवा बनाने के लिए थैलियम की ज़रूरत होगी। ससुर के दवा कारोबारी होने की वजह से ही वरुण को इसे हासिल करने में दिक्कत नहीं हुई।

इस पूरे मामले में सद्दाम हुसैन का ज़िक्र इसलिए आया क्योंकि वरुण ने सद्दाम हुसैन के बारे में पढ़ा था और वहीं से उसको थैलियम के बारे में पता चला कि कैसे सद्दाम अपने दुश्मनों के लिए थैलियम नाम के ज़हर का इस्तेमाल करता था। इराक में और इराक के बाहर कई ऐसी मौतें हुईं, जिनमें सीधा नाम सद्दाम हुसैन का आया। ऐसे कई किस्से हैं जिनसे सद्दाम का नाम जुड़ा।

सद्दाम हुसैन से जुड़े कई किस्से आए थे सामने :-

The Times न्यूज़ पेपर के हवाले से आपको सन 1988 में लिए चलते हैं। इराक के एक बिज़नेसमैन थे- अब्दुल्ला अली। अब्दुल्ला अली का अधिकांश बिज़नेस इराक में था लेकिन वे लंदन में रहते थे।

एक दिन शाम को अब्दुल्ला अली दोस्तों के साथ डिनर करने गए,  वहां पर उन्होंने डिनर किया, वोदका पिया। डिनर करने के बाद वो घर आ गए लेकिन कुछ दिन बीतने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। शुरुआत में उन्हें बुखार आया, जॉइंट्स में दर्द हुआ, फिर दर्द धीरे-धीरे और बढ़ गया और अली की मौत हो गई।

मौत के बाद जब टेस्ट किये गए तो वोदका में थैलियम के मिले होने की बात सामने आई। किसने दिया, नहीं पता। लेकिन अली की मौत के बाद एक बात ज़रुर सामने आई कि वह बिज़नेसमैन के साथ-साथ एक अंडरकवर एजेंट भी थे। जो इराक़ की गोपनीय सूचनाएं बाहर पहुंचा रहे थे। उस वक्त इराक में सद्दाम हुसैन को गद्दी संभाले 9 वर्ष हो चुके थे। अली की मौत की कड़ी साफ तौर पर सद्दाम से जुड़ रही थी।

अगर ये नाकाफी है तो मशहूर केमिस्ट जॉन एम्सले की किताब ‘The Elements of Murder’ के ज़िक्र उठाइए।

1992 में इराक के दो आर्मी ऑफिसर अब्दुल्ला अब्देलतीफ और अब्देल-अल-मस्दीवी भागकर दमिश्क पहुंचे थे। वो उस दौर के इराक के कई राज़ जानते थे। वहां कुछ दिन में इनकी भी तबीयत बिगड़ी। शरीर में थैलियम की पुष्टि। हालांकि जान बच गई थी और शिया एक्टिविस्ट सलमा बहरानी की दही खाने के बाद मौत। तब भी शरीर में थैलियम की पुष्टि हुई।

एक और केस, माजिदी जेहाद नाम के एक्टिविस्ट इराक से लंदन के लिए रवाना हो रहे थे। पासपोर्ट लेने के लिए बगदाद पुलिस स्टेशन गए और वहां ऑरेंज जूस पिया। लंदन पहुंचते ही कुछ ही दिन में माजिदी जेहाद की मौत हो गई। उनके शरीर में भी थैलियम की पुष्टि हुई।

यानी एक के बाद एक ऐसे केस आए, जहां सद्दाम की हुकूमत को छोटी-बड़ी चुनौती देने वाले लोगों की इसी स्लो-पॉइज़न से मौत हुई और इन्हीं बातों के आधार पर कहा जाता है कि सद्दाम अपने विरोधियों को यही ज़हर देकर मरवाता था। वहीं से उसे ये आइडिया मिला और उसने अपने सास-ससुर, पत्नी और साली को खत्म करने की खतरनाक साजिश रच डाली थी।

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