एटिकेट्स के साथ माता-पिता अपने बच्चों को गुड और बैड टच के बारे में भी दें जानकारी


Jasmine Siddiqui

हर माता-पिता अपने बच्चों को सुरक्षित रखना चाहते है। इसके लिए वह तरह-तरह की कोशिश करते है कि उनका बच्चा सुरक्षित रहें। जबतक बच्चा छोटा होता है तबतक वह अपने माता-पिता के साथ रहता है, लेकिन जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता जाता है तो वह ट्यूशन जाना शुरु कर देता है और अपने दोस्तों के साथ बाहर खेलने-कूदने भी जाने लगता है। ऐसे में हर माता-पिता अपने बच्चें को सड़क पार करने के बारे में भी जानकारी देते है। इसके साथ ही दूसरों के साथ व्यवहार कैसे करें इस बारे में भी बताते है, लेकिन कोई उन्हें गलत तरीके से छुए या फिर गुड व बैड टच क्या होता है इस बारे में बताना जरुरी नही समझते है।

आपने अक्सर लोगों को कहते हुए सुना होगा कि बच्चे भगवान का रुप होते है। बच्चे इतने नादान और मासूम होते है कि, उन्हें पता ही नही चलता कि कौन उन्हें किस नज़र से देख रहा है या फिर किस तरीके से छू रहा है। वहीं आजकल आये दिन बच्चों से शोषण की खबरे सामने आती रहती है। ऐसे में बेहद ज़रुरी है कि हर माता-पिता अपने बच्चों को गुड और बैड टच के बारे में समझाकर सही और गलत के बीच में अन्तर बताएं।

कई माता-पिता ऐसे होते है जिन्हें अपने बच्चों के साथ इस बारे में बात करने पर शर्म आती है, लेकिन यह आपको ध्यान रखना होगा कि बच्चों को सुरक्षित और सशक्त बनाने की जिम्मेदारी आपकी है। वहीं दूसरी तरफ बच्चों का मन बहुत कोमल होता है। कई बार वो अपने साथ हुए गलत व्यवहार को भी बताने से डरते व झिझकते है। ऐसे में बच्चों को गुड और बैड टच के बारे में बताना थोड़ा संवेदनशील होता है। तो आइए आज जानते है कि बच्चों को किस तरह से गुड और बैड टच के बारे में बताना और फर्क समझाना चाहिए।

बैड और गुड टच में अन्तर बताएं- माता-पिता अपने बच्चें को 3-4 साल की उम्र में ही गुड और बैड टच के अन्तर के बारे में समझाना चाहिए। इसके साथ ही अपने बच्चों को ये भी बताएं कि, जैसे माता-पिता उन्हें जिस तरह चूमते है, उन्हें गले लगाते है तो उन्हें बिल्कुल भी बुरा नही लगता है तो यह होता है गुड टच। वहीं अगर कोई जबरदस्ती आपको छुएं और आपको अच्छा महसूस नही हो रहा है तो यह बैड टच कहलाता है।

शरीर के अंगो की जानकारी दें- बच्चों को उनके शरीर के बारे में जानकारी दें, क्योंकि कई बार ऐसा होता है माता-पिता शरीर के अंगो को सही नाम से नही पुकारते है। ऐसे में बेहद ज़रुरी है कि बच्चों को शरीर के हर हिस्से के अंगो की सही तरीके से जानकारी दें। इसके साथ यह भी बताएं कि अगर कोई भी उन्हें बुरी तरह से छुएं तो वह उसका विरोध करें।

बच्चों को उनके शरीर का मालिक बनने दें- बच्चें जब 3-4 साल के हो जाएं, तो उन्हें उनके शरीर के महत्व के बारे में समझाएं कि उनका शरीर केवल उन्हीं का है और वहीं उसके मालिक है। इसके साथ यह भी बताएं कि किसी दूसरे को कोई भी हक नही है कि वह आपके शरीर पर अपना हक जताएं। अगर किसी का छूना अपको अच्छा नही लगता है तो बेझिझक इसकी शिकायत आप अपने माता-पिता से करें।

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