बेरोजगारी ले रही है हर रोज 35 नौजवानों की जान, 2020 में करीब 16 लाख घट जाएँगी नौकरियां, रिपोर्ट में खुलासा


Ramesh Kumar

एक मशहूर कहावत है जिसमे कहा गया है कि ज़िन्दगी जीने के लिए क्या चाहिए ? रोटी, कपड़ा और मकान। अगर ये तीनों मिल जाएं तो ज़िन्दगी खुशहाल और गुलजार हो जाती है लेकिन आपने कभी यह सोचा है कि रोटी,कपड़ा और मकान कैसे मिलता है ?

जी हाँ,  आप सही सोच रहे हैं , रोटी, कपड़ा और मकान प्राप्त करने के लिए हमें रुपये कमाने पड़ते हैं और ये रुपये कमाने के लिए नौकरी करनी पड़ती है। जरा सोचिए, अगर नौकरी ही ना हो तो क्या होगा ? जब नौकरी ही नहीं होगी तो आदमी खायेगा क्या और बचाएगा क्या ? अगर बचाएगा नहीं तो मकान खरीदेगा कैसे ?

मैं आपको ये बातें इसलिए बता रहा हूँ क्योंकि अभी हाल ही में एनसीआरबी की एक रिपोर्ट आयी है जो काफी डरावनी और चौकानें वाली है। इस रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है कि बेरोजगारी के कारण औसतन प्रतिदिन 35 लोगों ने जान दी है। साल 2018 में, आंकड़ों के मुताबिक कुल 12,936 लोगों ने बेरोजगारी के कारण जान गंवाई है।

एक रिपोर्ट और आयी है, यह रिपोर्ट देश की सबसे बड़ी बैंक ‘स्टेट बैंक ऑफ इंडिया’ की रिसर्च विंग ईकोरैप ने जारी की है। इस रिपोर्ट में यह कहा गया है कि 2018-19 में 89 लाख 70 हज़ार नए रोजगार उत्पन्न हुए हैं। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि 2019-20 में तक़रीबन 15 लाख 80 हज़ार नये रोजगार घट जायेंगे और ये घटकर करीब 73 लाख 90 हज़ार रह जाएंगे। ईकोरैप की रिसर्च टीम ने यह भी अनुमान लगाया है कि भारत की जीडीपी 2019-20 में 5 फीसदी के आसपास रह सकती है।

यह समझना अति आवश्यक है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की ऐसी दुर्गति क्यों हुई ? इसकी क्या वज़ह है ? इसकी अगर मुख्य वजह देखी जाए तो साफ़ है कि खरीददारी के लिए लोगो के पास पैसा नहीं है, पास में पैसा इसलिए नहीं है क्योंकि रोजगार नहीं है, रोजगार इसलिए नहीं है क्योंकि सरकार ने कंपनियों और उद्योगों की कमर तोड़ रखी है।

उद्योग लगेंगे तो रोजगार पैदा होगा, रोजगार पैदा होगा तो लोगों के पास पैसे आएंगे और जब पैसे आएंगे तो खरीदने की क्षमता बढ़ेगी और जब खरीदने की क्षमता बढ़ेगी तो मांग बढ़ेगी , मांग बढ़ने से फिर उद्योग लगेंगे। लोग जब खरीददारी करेंगे तो एक और फायदा होगा कि पैसा बाजार में घूमेगा जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और जीडीपी ग्रोथ रेट भी बढ़ेगा।

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